प्रदूषण से बचाव


आलेख
*प्रदूषण से बचने की दिशा में मेरे कदम*

       प्रदूषण शब्द ही प्रदूषित प्रतीत होता है ।अब जिस शब्द में ही दोष आ जाये उससे शुद्धता की क्या अपेक्षा की जा सकती है ।दूषण अर्थात दूषित ,,,जिसमे विकार आ जाये या जो बेकार हो जाये ।
    आज के वैज्ञानिक युग ने चाहे कितनी भी तरक्की क्यों न कर ली हो,परन्तु प्रकृति पर अपनी सत्ता कायम कर पाने में असमर्थ ही रहा है,इसलिए तो आज प्रकृति की विकृति को सही कर पाने में असक्षम है ,तभी तो बढ़ती हुई प्रदूषण की समस्या ने एक भयंकर बीमारी का रूप धर लिया है ,जिसमें मनुष्य ही नहीं सम्पूर्ण सृष्टि जकड़ी हुई है । अपने क्षणिक सुख की आपूर्ति हेतु मानव ने इस हद तक प्रकृति का दोहन किया है अब स्वयं ही मानव इसका शिकार होने लगा है ।हमने प्रकृति को इतना कमजोर कर दिया है कि अब वो हमारे बोझ को संभाल पाने में असमर्थ है ।प्रदूषण की बढ़ती गति ने हमारी *नीली परी* के अस्तित्व पर ही खतरा  बढ़ा दिया ।

       हम सभी जानते हैं कि मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छ पर्यावरण की आवश्यकता होती है और एक अच्छे पर्यावरण के लिए अच्छे मनुष्य और उसमे अच्छी आदतों का होना अति आवश्यक है ।
           मनुष्य,जीव, पौधे,प्रकृति आदि सभी पर्यावरण के अभिन्नं अंग हैं।अतः हमें इसकी सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए । प्रदूषण से बचने की दिशा में हालांकि सरकार को अग्रणी होना चाहिए,किंतु इस दायित्व का निर्वहन प्रत्येक मनुष्य को करना चाहिये ।इस दिशा में मेरे द्वारा उठाये गए कुछ कदम इस प्रकार से हैं,,,,,,,,,,,

*(1)* अपने जन्मदिवस के अलावे अन्य आनंददायी दिवस को एक पेड़ लगा कर अपनी खुशियां प्रकृति के साथ बांट कर ।
*(2)* जल का प्रयोग उचित मात्रा में और उपयोग हुए जल के पुनर्प्रयोग व संरक्षण पर विशेष बल देकर ।

*(3)* जहाँ तक सम्भव हो वाहनों के प्रयोग से बचाव ।आवश्यकता पड़ने पर पर्यावरण के अनुकूलित साधनों का प्रयोग ।सहयात्रा बनकर इस दिशा में मजबूत कदम उठाया जा सकता है ।

*(4)* पर्यावरण संरक्षण हेतु अन्य लोगों को भी जागरूक करने का सतत प्रयास।जैसे कि ,,, सार्वजनिक जागरूकता अभियान, पर्यावरणीय सम्मेलन,नुक्कड़ नाटक आदि के द्वारा ।

*(5)* इन सबके अलावे अपनी कलम के ताकत पर कविताओं,कहानियों,नाटक आदि के द्वारा जन-जन को इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु जोड़ना ।

         इस तरह से हमें अपने वर्तमान के साथ-साथ अपने भविष्य को भी सुरक्षित व स्वस्थ  बनाये रखने का निरन्तर प्रयास करते रहना चाहिए; क्यूंकि हम सभी जानते हैं कि हमारी पृथ्वी ही एकमात्र ऐसी ग्रह है जिसपर जीवन सम्भव है और इसे अक्षुण बनाये रखने के लिए हमे कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने की नितांत  आवश्यकता है ।
*अपने बेहतर कल हेतु हमे आज  भौतिकता की कुछ कुर्बानी तो देनी ही होगी ।*

*स्वराक्षी स्वरा*
*खगड़िया बिहार*

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