दर्द

चोट तन के उपर या अंदर हो तो उसके दर्द को सहा भी जा सकता है,लेकिन चोट जब मन पर लग जाए तो उसका दर्द न किसी दवाई से और न ही किसी दर्द निवारक सुई से ही होता है। चोटिल मन बहुत ज्यादा तकलीफ देता है । ये न तो दर्द में जीने देता है,और न ही मरने देता है।

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