मैंने इस संसार में अनेक चेहरे देखे हैं, अनेक स्वभाव, अनेक संबंध…पर सच कहूँ, कुछ स्त्रियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें देखकर मन सहज ही श्रद्धा से भर जाता है। वे केवल मनुष्य नहीं लगतीं, वे किसी प्रार्थना का उत्तर प्रतीत होती हैं, किसी मंदिर में जलती अखंड लौ जैसी, किसी थके हुए जीवन पर ईश्वर के हाथ जैसी… मैंने देखा है गंगा सी निर्मल और शांत स्त्रियों को, जिनकी आँखों में शोर नहीं, गहराई होती है। जो बोलती कम हैं, पर उनके मौन में पूरा ब्रह्मांड धड़कता है। वे वैसी ही होती हैं जैसे सावन की पहली वर्षा के बाद मिट्टी से उठती सौंधी सुगंध, जो बिना कुछ कहे आत्मा तक उतर जाती है। कुछ स्त्रियाँ सचमुच गुलाब की पंखुड़ियों सी कोमल होती हैं। उनकी संवेदनाएँ इतनी नाज़ुक होती हैं कि किसी अपने की हल्की उदासी भी उन्हें भीतर तक भिगो देती है। वे अपने हिस्से के दुःख छुपाकर दूसरों के हिस्से की मुस्कान सीती रहती हैं। जैसे कोई माँ रातभर जागकर बच्चे के माथे पर पट्टी रखती रहे और सुबह वही बच्चा उसे मुस्कराता हुआ देखे तो वह अपनी सारी थकान भूल जाए। स्त्रियाँ अक्सर ऐसी ही होती हैं, टूटती हैं, पर बिखरती नहीं, रोती हैं, पर घर क...
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