प्रेम तो है समर्पण

प्रेम तो है इक समर्पण पाठ हमने पढ़ रखे थे


भूल कर सारे जहां को बस प्रेम को हरपल निहारा
दे के सांसे दे के तन-मन प्रेम को हरदम निखारा
प्रेम में आतुर हुए इतना की समझे सब नकारा

प्रेमभक्त हम हो के ईश्वर प्रेम को ही कर रखे थे
प्रेम तो है......

हमने माना था कि जीवन प्रेम में हो, प्रेममय हो
प्रेम कीचड़ का कमल हो,प्रेम का ही बस समय हो
भूल कैसे हम न करते,प्रेम करके ये कहो

प्रेम की स्वर्णिम कथाएं भी सभी ने गढ़ रखे थे
प्रेम तो है.....

ये समर्पण छीन लेगा सब नहीं हम जान पाएं
किसने किसको कितना लूटा,ये कहो कैसे बताएं
प्रेम में जो घाव पाए,कहो स्वरा किसको दिखाएं
स्नेह सरिताऐं भी तब सर पे हमारे चढ़ रखे थे
प्रेम तो ....

स्वराक्षी स्वरा

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