लोक आस्था का महापर्व ....छठ
*जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम ।*
*तमोहरि सर्वपापघ्नं प्रणतोडस्मि दिवाकरम् ।*
भारतीय गणराज्य के सर्वाधिक लोक आस्था के पर्वों में से एक छठ यानी सूर्योपासना का पर्व है।यह चार दिवसीय पर्व में पहला दिन कदुआ-भात,खरना,डूबते सूर्य को अर्घ्य एवं फिर सूर्योदय का अर्ध्य! यह पहला ऐसा पर्व है जो न केवल उगते हुए बल्कि डूबते हुए सूर्य की भी उपासना भी करना सिखाता है। पूरी निष्ठा से मनाया जाने वाला यह पर्व अनेक राज्यों में खासकर बिहार औ उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। केरल आदि राज्यों में 'ओणम' भी इसी पर्व का प्रतिरूप है। शारदा सिन्हा व अनेक गायकों ने अपने मधुर गान से इस पर्व के सम्मान में बहुत ही वृद्धि की ,*छठ माई की जय!*
कहा जाता है कि यह पर्व त्रेता युग में भगवान राम ने सरयू तट पर किया था।अंजना को भी सूर्य की आराधना से ही हनुमान पुत्र रूप में प्राप्त हुआ था। माँ कुन्ती ने भी महारथी कर्ण जैसा स्वस्थ और सबल पुत्र भगवान सूर्य की अर्चना से ही पाया था। श्रीकृष्ण की भगवान की लाडली बहन सुभद्रा ने भी यह पर्व किया और अभिमन्यु जैसा वीर पुत्र पाया था। वैज्ञानिक अनुसंधान भी यह पुष्टि करते हैं कि सूर्य की रोशनी से विटामिन डी की कमी दूर होती है।कुष्ठ जैसे रोग भी सूर्य-प्रकाश के प्रभाव से दूर होते हैं। इतिहास में कतिपय उदाहरण हैं कि कुष्ठ के निदान के लिए लोग सूर्य की उपासना करते हैं!यह पर्व यूँ तो पोखर,झील व नदियों के किनारे ही लोग करते हैं। आजकल घर में ही छोटा पोखर बनाकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाने लगा है,मगर आस्था में कोई कमी नहीं होती है।।इस पर्व की महत्ता यही है कि सात समंदर पार से भी लोग यह पर्व करने घर आते हैं। केंद्र सरकार स्पेशल ट्रेन चलाती है।कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि यह पर्व बिहार और बिहारियों का सबसे बड़ा पर्व है। हां यह कोशिश हो कि पटाखे व अन्य प्रदूषण के वस्तुओं से हमें परहेज करना चाहिए और साथ ही उन गीतकारों और गायकों से भी अनुरोध है कि अपनी फूहड़ता से भरे शब्दों पर थोड़ा लगाम लगाएं ।लोकपर्व की महत्ता को अपनी थोड़ी सी प्रसिद्धि हेतु मलिन न करें । इन्हीं छोटे आलेख के माध्यम से आप सभी देशवासियों को छठ पर्व की ढेरो बधाई और हार्दिक स्नेहाभिनंदन!
*स्वराक्षी स्वरा, खगड़िया-बिहार*
9576891908
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