एक कदम पोषणता की ओर....
*एक कदम पोषणता की ओर*....
*व्यर्थ लालच न अपनाएं*
*पोषित आहार ही खाएं*
प्रतिवर्ष 1 से 7 सितंबर तक भारतीय पोषण माह मनाया जाता है,जिसका मुख्य उद्देश्य जन-जन तक पौष्टिक आहार और पोषण की महत्ता को पहुंचाना है। यूं तो हर आयु वर्ग के लिए पोषण अति आवश्यक होता है किंतु यदि इसकी सही आधारशिला बचपन से ही रखी जाए तो बेहतर मानी जाती है। आज की आधुनिकता में जहां हर चीज का आधुनिकीकरण हो गया है तो इससे हमारा पोषण कैसे अछूता रह सकता है ? आज *भोजन भी आधुनिकता के चूल्हे में ही पकता है और व्याधियों के प्लेट में सज कर हमारे सामने प्रस्तुत होता है जिसे हम अति आनंद के साथ ग्रहण करते हैं।* इस सबमें यह भूल जाते हैं कि इससे हमारे स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचता है ।
चाऊमीन, बर्गर,पिज़्ज़ा ,मैगी आदि जैसे न जाने कितने ऐसे फास्ट फूड हैं जो *अल्पता* के नाम को पूर्ण रूप से साकार कर रहे हैं फिर चाहे वो *समय हो या जीवन* आज बच्चों को दूध नही मैगी भाती है । बड़ों को कॉफी नहीं कोकिन भाती है । ऐसे में हम बेहतर स्वास्थ्य की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं ।
ऐसे में पोषण माह का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है । वर्ष 2021 का "पोषण माह" तो हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं होना चाहिए ,क्योंकि अभी अभी पूरा देश कोरोना जैसी भयानक त्रासदी से गुजरा है, और गुजर रहा है साथ ही टीकाकरण कराने से लोगों के इम्यूनिटी सिस्टम पर भी अच्छा खासा प्रभाव पड़ा है ।
ऐसे में अति आवश्यक हो जाता है कि हम स्वयं के स्वास्थ्य की देखभाल पहले से भी ज्यादा सुचारू रूप से करें । अभी हम, हमारा परिवार, समाज, देश सभी क्षीणता का अनुभव कर रहे हैं । हमें अपने स्वास्थ्य शक्ति को बनाए रखने की अति आवश्यकता है।
यदि वृहद रूप में इसे लिया जाए तो इसके कई दुष्परिणाम दृष्टिगत होते हैं .....
1...सबसे पहले तो अस्वस्थता की वजह से हम कमजोर होंगे ।
2...दूसरा हम धन उपार्जन करने में असमर्थ होंगे जिससे हमारा परिवार कमजोर होगा।
3... हमारे परिवार की धुड़ी लड़खड़ाने से हमारा समाज प्रभावित होगा और इससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था भी कमजोर होगी।
4... देश की अर्थव्यवस्था कमजोर होने से हमारा अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।
5...इतना ही नहीं मृत्यु दर में वृद्धि होगी,जिसका सारा दोष या तो भगवान पर या प्रत्यक्ष रूप से सरकार पर ही डाल देंगे और अराजकता की स्थिति पैदा करेंगे।
तो सोचिए एक हमारे पोषित न होने की वजह से कितने घातक परिणाम दृष्टिगोचर होंगे। इसलिए आइए हम सब *पोषण-माह-2021* को केवल कागज़ों या नारों तक ही न समेटे वरन इसे अपने जीवन शैली में शामिल कर एक कदम....पोषणता की ओर बढ़ाएं।।
*है कोरोना से तन लाचार*
*सोच-समझ कर लो आहार।।*
*स्वस्थ रहेगा जब तन-मन*
*तब ही अर्जित होगा धन ।।*
*देश राज्य हर एक जिला*
*हो स्वस्थ पुष्प से खिला-खिला ।।*
*स्वराक्षी स्वरा*...✍️
*खगड़िया बिहार*
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